इंजीनियर मनदीप किरार एवं ग्राम पंचायत सचिव ओम गौर के द्वारा किया गया था भारी भष्टाचार।
आदिवासियों के उद्धार के लिए जंगल में बना तालाब चडा भ्रष्टाचार की भेंट।
संजय अग्रवाल // जनपद पंचायत टिमरनी की ग्राम पंचायत बड़झिरी का 35 लाख 31 हजार रुपये का अमृत सरोवर अब लोकायुक्त के रडार पर है। तालाब निर्माण के नाम पर करीब 27 लाख रुपये के भुगतान को लेकर लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है। शिकायत के बाद मंगलवार को लोकायुक्त की टीम सीधे मौके पर पहुंची और अमृत सरोवर स्थल का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया। शिकायत में आरोप है कि जिस तालाब के निर्माण और खुदाई के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया, मौके पर उसका अपेक्षित स्वरूप दिखाई नहीं देता। अब यह आरोप कितना सही है और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज काम वास्तव में जमीन पर कितना हुआ इसका जवाब लोकायुक्त की तकनीकी जांच से सामने आएगा। मंगलवार दोपहर लोकायुक्त डीएसपी वीरेंद्र सिंह एवं नवीन अवस्थी के नेतृत्व में टीम बड़झिरी पहुंची। टीम ने स्थल का निरीक्षण किया और मौके की स्थिति को देखकर पंचनामा बनाया गया साथ ही निरीक्षण के दौरान जनपद सीईओ चेतना पाटिल, संबंधित इंजीनियर, ग्राम पंचायत के सरपंच और वन विभाग मगरदा के रेंजर मुकेश रघुवंशी को भी मौके पर बुलाया गया। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि फाइल में दर्ज काम और जमीन पर मौजूद काम में कितना अंतर है।
मौके पर बनाया पंचनामा, अब तकनीकी जांच से खुलेगी पूरी कहानी
शिकायतकर्ता संजय अग्रवाल पत्रकार ने लोकायुक्त में शिकायत कर आरोप लगाया है कि अमृत सरोवर के नाम पर करीब 27 लाख रुपये की राशि निकाल कर भारी भ्रष्टाचार किया गया है, जबकि मौके पर तलाब खुदाई और निर्माण कार्य नहीं दिखाई देता है यदि रिकॉर्ड में लाखों रुपये का काम दर्ज है तो जांच में यह सामने आना होगा कि मौके पर कितनी मात्रा में खुदाई हुई? तालाब का वास्तविक आकार कितना है? माप पुस्तिका में क्या दर्ज है? किस आधार पर भुगतान किया गया? कार्य का सत्यापन किस अधिकारी ने किया? मस्टर रोल में दर्ज मजदूरी और वास्तविक कार्य में कितना मेल है? इन सवालों के जवाब दस्तावेजी और तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएंगे।
वन विभाग की अनुमति नहीं तो वन परिसर में किसकी अनुमति से हुए खुदाई
मामले में वन विभाग की भूमिका से जुड़ा सवाल भी सामने आया है। वन विभाग मगरदा के रेंजर मुकेश रघुवंशी ने लोकायुक्त की टीम को बताया कि हमारे विभाग द्वारा किसी प्रकार की तलाब खुदाई की अनुमति नहीं दी गई नियम अनुसार यह गलत है और कैसे वन परिक्षेत्र में पंचायत ने खुदाई कर दी हमें जिसकी कोई जानकारी नहीं थी और न ही किसी प्रकार से तलाब की खुदाई हुई है। यदि अनुमति जरूरी थी और अनुमति नहीं दी गई, तो खुदाई और निर्माण की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी? यही बिंदु अब लोकायुक्त की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके का पंचनामा बना, अब दस्तावेजों की बारी लोकायुक्त टीम ने मौके का पंचनामा तैयार किया है। अब तकनीकी टीम द्वारा स्थल की वास्तविक स्थिति और सरकारी दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। जांच में तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, माप पुस्तिका, मस्टर रोल, भुगतान वाउचर, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल अहम होगी। अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य गांव में जल संरक्षण के लिए स्थायी जलस्रोत तैयार करना है। ऐसे में योजना की राशि के उपयोग को लेकर उठे सवालों की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि मामला सिर्फ एक निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा है।
लोकायुक्त की जांच बताएगी तालाब बना या सिर्फ भुगतान हुआ?
फिलहाल बड़झिरी का अमृत सरोवर लोकायुक्त की जांच के घेरे में है। मौके का पंचनामा बन चुका है और तकनीकी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। 35 लाख की योजना, 27 लाख के भुगतान के आरोप और मौके की स्थिति इन तीनों के बीच का सच अब जांच की मेज पर है। यदि जांच में शिकायत के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय होने और कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर नहीं मिलता, तो आरोपों की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। अब नजर लोकायुक्त की तकनीकी जांच पर है क्योंकि बड़झिरी में असली सवाल तालाब से ज्यादा उस रकम का है, जो तालाब के नाम पर खर्च बताई जा रही है। सवाल यह भी उठना है कि अमृतसर सरोवर का निर्माण आदिवासी क्षेत्र जो की वन ग्राम है। तलाव का उद्देश्य गरीब आदिवासी किसान उस तलाव से खेती संचित कर सके एवं आय के रूप में मछली पालन इत्यादि व्यापार कर सके लेकिन सिस्टम में बैठे भ्रष्टाचारी इंजीनियर मनदीप किरार एवं सचिव ओम गौर के द्वारा कागजों पर ही तलाव बना दिया गया और भुगतान अपने रिश्तेदारों के माध्यम से और अपने चुनिंदा ठेकेदारों को करवा लिया गया जिले में बैठे विभाग के प्रमुख अधिकारियों की भी कहीं ना कहीं साट गांठ इसमें शामिल है?