पेपर लीक के बाजार को क्यों मिल रहा बढ़ावा, ये 2 कारण ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार

Updated on 08-10-2026 11:26 AM
लेखक: विमल कुमार

परीक्षाओं में धोखाधड़ी अपराध से पहले एक बाजार है। नौकरियों की कमी से इसकी मांग रहती है और पकड़े जाने की कम आशंका से यह जिंदा है। 2018 में उत्तर प्रदेश में ट्यूबवेल ऑपरेटर के 3,210 पदों के लिए परीक्षा होनी थी। नौकरी में न कोई बड़ा रुतबा था, न तनख्वाह बहुत ज्यादा थी। फिर भी परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक हुआ और पुलिस के मुताबिक, पेपर की एक कॉपी करीब सात लाख रुपये में बिकी। एकबारगी यह भले पागलपन लगे, लेकिन यह उस नौकरी की असली कीमत दिखाती है।
मुख्य वजह: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) विवाद ने पेपर लीक को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनाया, पर तस्वीर इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। 2004 से 2026 के बीच के 110 मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि सिर्फ एक चौथाई मामले क्लासिक पेपर लीक के थे। बाकी में अंदरूनी मिलीभगत, मैसेजिंग ऐप्लिकेशन पर पेपर वायरल करना, डमी कैंडिडेट बिठाना, ब्लूटूथ डिवाइस और आंसर शीट से छेड़छाड़ जैसे मामले रहे। करीब 85% फर्जीवाड़ा प्रवेश परीक्षा के लिए नहीं, सरकारी भर्तियों के लिए था। इससे पता चलता है कि मूल समस्या पेपर नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी है। 2024 में यूपी पुलिस सिपाही के 60,244 पदों के लिए 48 लाख ने आवेदन किया । यानी एक पद पर 80 दावेदार। इसी कमी का फायदा कोचिंग माफिया और पेपर लीक करने वाले उठाते हैं।
किस्मत का मोल: इसमें बड़ी भूमिका किस्मत की भी है। मान लीजिए, ग्राम सचिव भर्ती की कोई परीक्षा एक ही दिन दो बार होती है। दोनों बार के पेपर अलग हों। लिहाजा, मेरिट लिस्ट भी एक जैसी नहीं रहेगी और कटऑफ भी अलग होगी। यहां सभी ने पूरी तैयारी की और किसी ने नकल नहीं की। पर, बस सवाल बदल गए। ऐसे में किस्मत का मोल बढ़ गया।

मेहनत का रिटर्न: इसका असर उम्मीदवारों के हिसाब-किताब पर पड़ता है। कट ऑफ से कुछ कम अंक लाने वाले अभ्यर्थी अगर दोबारा मेहनत करें, तो नंबर भले थोड़े बढ़ जाएं, लेकिन चांस बढ़ना मुश्किल है। वहीं, अगर पेपर पहले मिल जाए तो सिलेक्ट होना लगभग तय। मेहनत का नतीजा जितना अनिश्चित है, शॉर्टकट उतना ही कीमती । दलाल यही फर्क बेचता है। नोबेल विजेता अर्थशास्त्री गैरी बेकर के मुताबिक, अपराधी पकड़े जाने का चांस, सजा का चांस और सजा की सख्ती तौलता है।
भय ही नहीं: जिन 110 मामलों का विश्लेषण किया गया, उनमें सिर्फ 10 में सजा हुई है। इस साल सरकार ने कानून कड़ा कर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने और जेल का प्रावधान किया। लेकिन, जब सजा ही दुर्लभ हो, तो सख्ती कागजी हो जाती है।

लंबित मामले: कानून में दो महीने में जांच और तीन महीने में ट्रायल की मियाद तय की गई है। लेकिन, सिर्फ तारीख तय करने से फॉरेंसिक लैब और प्रॉसिक्यूटर नहीं बनते। फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले ही लाखों केस लंबित हैं। जल्दबाजी में कमजोर चार्जशीट बरी होने का रास्ता भी खोल सकती है।
तीन कदम जरूरी: मेरे ख्याल से तीन कदम उठाए जाने चाहिए। सरकार को पकड़ पर निवेश बढ़ाना होगा यानी सजा बढ़ाने से ज्यादा जरूरी जांच एजेंसियों और डिजिटल फॉरेंसिक लैब को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, वैंडरों के सिक्योरिटी ऑडिट पर भी निगरानी करनी चाहिए। टेंडर सबसे कम बोली पर नहीं, बल्कि डेटा और पेपर सिक्योरिटी की कड़ी जवाबदेही पर तय हों। साथ ही फिक्स्ड रिक्रूटमेंट कैलेंडर बने, जिससे हर साल तय समय पर भर्ती हो।

अवसर बढ़ाना होगा: हमें यह याद रखना चाहिए कि ट्यूबवेल ऑपरेटर के पेपर की सात लाख रुपये की कीमत किसी गिरोह की सनक नहीं, हमारे जॉब मार्केट का कड़वा सच है। यह उस गहरी खाई का सबूत है जो एक साधारण सरकारी नौकरी और बाहर की दुनिया के बीच बनी है। जब तक यह खाई रहेगी, पुल पर वसूली करने वाले दलाल खड़े रहेंगे। कानून उन्हें पकड़ सकता है, अगर क्षमता हो, लेकिन बाजार तभी सिमटेगा जब अवसरों का पुल चौड़ा होगा।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 08 October 2026
 मानसून अपने आखिरी चरण में चल रहा है। बारिश का दौर फिर भी खत्म नहीं हो रहा है। मौसम विभाग का नया अलर्ट भी आ गया है। IMD ने 20…
 08 October 2026
नई दिल्लीः भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भारत और इजरायल को कट्टरपंथी इस्लामी आतंकी हमलों की एक नई लहर की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी…
 08 October 2026
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने पर बुधवार को सहमति जताई, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के…
 08 October 2026
नवीन निश्चल, नई दिल्ली: 'नशे के खिलाफ अभियान, देश को सलाम' अभियान के तहत जब गांजा, स्मैक, हेरोइन जैसे ड्रग्स पर दिल्ली पुलिस का एक्शन शुरू हुआ तो नशा बेचने…
 08 October 2026
लेखक: विमल कुमारपरीक्षाओं में धोखाधड़ी अपराध से पहले एक बाजार है। नौकरियों की कमी से इसकी मांग रहती है और पकड़े जाने की कम आशंका से यह जिंदा है। 2018…
 08 October 2026
लेखक: स्वपन दासगुप्ताराजनीतिक सत्ता में लंबे समय तक बने रहना और उस दौरान कोई सार्थक प्रभाव छोड़ना, ये दोनों बातें जरूरी नहीं कि एक-दूसरे से जुड़ी हों। मुहम्मद शाह 'रंगीला'…
 22 August 2026
पटनाः बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जो नई राजनीतिक हलचल मचाई है उन पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस के सुंदरकांड के दोहे की यह पंक्ति-…
 22 August 2026
लखनऊ: मशहूर यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन दिव्‍या मिश्रा हत्‍याकांड में पुलिस को सीतापुर के एक वकील के शामिल होने की सूचना मिली है। आईसीआईसीआई बैंक में रिलेशनशिप अफसर रही…
 22 August 2026
रामगढ़ (झारखंड), झारखंड के रामगढ़ के बरकाकाना में मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात फैक्ट्री में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। फैक्ट्री में काम के दौरान अचानक टरबाइन ब्लास्ट हो…
Advt.