
उन्होंने कहा- प्रदेश में 22% से अधिक आबादी आदिवासी समाज की है, लेकिन आज भी उसे अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। समाज को अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा।
सिंघार ने कहा कि आदिवासी भीख नहीं, अपना अधिकार मांगता है। अंग्रेजों के समय आदिवासियों के लिए अलग कोड की व्यवस्था थी तो आज समाज को अपना आदिवासी कोड क्यों नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए एक बार नहीं, 100 बार भी लड़ेंगे।
सम्मेलन की शुरुआत माता मंदिर चौराहे से रैली के साथ हुई। पारंपरिक परिधानों में पहुंचे समाज के लोगों ने ढोल-मांदल की थाप पर आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किए। सम्मेलन में 22 से अधिक आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।