नियम के विरुद्ध किया सहायक यंत्री का आदेश?
मनरेगा के उप यंत्री को सोपा सहायक यंत्री का प्रभार नियमों को ताक पर रखकर हुआ खेल?
संजय अग्रवाल // हरदा जिले की जनपद पंचायत खिरकिया में सहायक यंत्री के पद का प्रभार मनरेगा में पदस्थ एक संविदा उपयंत्री को सौंपे जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की जिला पंचायत सीईओ व कलेक्टर से की गई है। शिकायतकर्ता संजय अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि विभाग में अन्य पात्र और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर प्रभार सौंपा गया। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि आखिर किस सक्षम अधिकारी के आदेश पर, किस नियम और किस शासकीय अनुमति के आधार पर यह प्रभार दिया गया है? यदि विभाग में सहायक यंत्री स्तर के अधिकारी उपलब्ध थे तो फिर मनरेगा के उपयंत्री को अतिरिक्त जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?
मंदीप किरार की लोकायुक्त में भ्रष्टाचार को लेकर चल रही जांच
इतना ही नहीं, उपयंत्री मंदीप किरार के खिलाफ पूर्व में वनग्राम बड़झिरी में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त भोपाल में दर्ज है और जांच चल रही है। ऐसे में जांच लंबित रहने के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण तकनीकी प्रभार दिए जाने पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए बताया कि यह प्रभार के आदेश दिनांक, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, सेवा नियमों का पालन, तकनीकी पात्रता, वरिष्ठता, कार्य विभाजन और विभागीय प्रक्रिया की बिंदुवार जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि क्या इस निर्णय से शासन के नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है। इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव, प्रमुख अभियंता (RES), नर्मदापुरम संभागायुक्त, हरदा कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है यह मामला केवल एक प्रभार आदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और नियमों के पालन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करेगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाही करता है।