काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह आज राजधानी काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करने वाले हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह आज पहली बार किसी देश के राजदूत के साथ वन-टू-वन बैठक करने वाले हैं। ये बैठक उस वक्त हो रही है जब दोनों देशों के बीच कम से कम तीन क्षेत्रों को लेकर सीमा विवाद गहराया हुआ है जबकि आपसी बातचीत से भारत और नेपाल 98 प्रतिशत विवादों को सुलझा चुके हैं। लेकिन कालापानी और सुस्ता को लेकर ऐसा पेंच फंसा हुआ है जिसे सुलझाना काफी मुश्किल दिख रहा है।सुस्ता को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद 2 अगस्त को हिंसक झड़प में बदल गया। यह झड़प नेपाली ग्रामीणों और भारतीय सीमा सुरक्षा कर्मियों के बीच हुई। आरोप है कि भारतीय पक्ष के लोग नवलपरासी पश्चिम में नेपाली इलाके में घुस गए और स्थानीय लोगों की तरफ से बाढ़ से बचाव के लिए बनाए जा रहे एक तटबंध को तोड़ दिया। मामले को और बढ़ने से रोकने के लिए नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स को दखल देना पड़ा।
द डिप्लोमेट ने नेपाली मीडिया के हवाले से बताया है कि जून में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी जब भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवान सुस्ता म्युनिसिपैलिटी-5 में तटबंध बनाने की जगह पर पहुंचे और वहां काम कर रहे लोगों पर प्रोजेक्ट रोकने का दबाव डाला। यह प्रोजेक्ट इलाके में बाढ़ की आशंका वाले रिहायशी इलाकों को सुरक्षा देने की कोशिशों का हिस्सा था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
भारत-नेपाल के बीच सीमा विवाद कहां और क्यों है?
भारत और नेपाल के बीच 1,800 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। दक्षिणी नेपाल में सुस्ता और नेपाल के पश्चिम में कालापानी-लिम्पियाधुरा-लिपुलेख का इलाका विवादित है। सुस्ता विवाद के मामले में इस इलाके के 24 किलोमीटर के हिस्से में कोई सीमा स्तंभ नहीं हैं और भारत और नेपाल सीमा तय करने के लिए नदियों और पेड़ों जैसी प्राकृतिक चीजों पर निर्भर हैं। गंडक जिसे नारायणी भी कहा जाता है नदी का रास्ता बदलने से सीमा की समस्या और जटिल हो गई है। 1816 की सुगौली संधि के तहत इस नदी की बीच की धारा ही सीमा तय करती थी।नेपाल के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों का हवाला देते हुए एक नेपाली मीडिया प्रकाशन ने बताया कि नई दिल्ली में नेपाली दूतावास ने सुस्ता में रविवार को हुई झड़पों का मुद्दा तुरंत भारत के विदेश मंत्रालय के सामने उठाया। इस सूत्र के अनुसार भारत का रुख यह था कि चूंकि जिस इलाके में तटबंध बनाया गया था जो विवादित है इसलिए यह निर्माण दोनों देशों के बीच बनी 'यथास्थिति' का उल्लंघन करता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है।2020 में नेपाली संसद में बदला गया था विवादित क्षेत्रों का नक्शा
2020 में नेपाल की संसद ने एक नया राजनीतिक नक्शा शामिल करने के लिए संविधान संशोधन पास किया था जिसमें विवादित कालापानी-लिम्पियाधुरा-लिपुलेख इलाके को नेपाल के अपने इलाके का हिस्सा दिखाया गया था। भारत ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इससे पहले नेपाल ने नई दिल्ली द्वारा इन इलाकों को भारतीय राज्य उत्तराखंड का हिस्सा दिखाए जाने पर आपत्ति जताई थी।