
भोपाल। गांधी मेडिकल कालेज से जुड़े हमीदिया अस्पताल की मर्चुरी की जर्जर बिल्डिंग को तोड़े जाने के बाद से दिनों शवों को घंटों खुले आसमान के नीचे सड़क पर रखना पड़ रहा है।
'दुखी परिजन बेबसी की हालत में पुलिस पंचनामा के दौरान खुले में ही शव वाहन का इंतजार करने को मजबूर हैं।
पिछले माह मई में मर्चुरी के बाहर खुले रास्ते पर ही एक शव का पोस्टमार्टम तक कर दिया गया। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी। अब अस्पताल में नई मर्चुरी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन मर्चुरी के बाहर शवों को सुरक्षित और ढककर रखने के लिए किसी प्रकार का अस्थाई शेड तक नहीं लगाया गया है।